।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

कृपा कृपा सब कोई कहै,कृपा पात्र नहीं कोय।

कृपा पात्र वह जानिये , जो अज्ञा वर्ति होय।।

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

When the spiritual power descenasara envelops,

The whole universe appears to be full of power, peace and joy.

 

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

उत्तमा सहजा वृति , माध्यमा ध्यान धारणा।

अधमा देव पुजा, तीर्थ यात्रा धमा धमा।

(श्री गणेशजी की मूर्ति के साथ लिखा है)

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

The path to god is not an easy one. The highest tortures

Have to be experienced before we attain to god head.

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

दो बोतन को याद जो चाहत कल्याण।

नारायण एक मौत को दुजे श्री भगवान्।

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

स्थान से तन की शुध्दि ध्यान से मन की,

शुध्दि और दान से धन की शुध्दि होती है।

इसके सामने वाला स्थान गोविन्द बाड़ी है। इसके बाद रामकुटिर (बुर्ज) आती है।यह कुटिर दक्षिण-पश्चिम के कोने पर बनी हुई है।इस बुर्ज से पश्चिम  से दक्षिण दीवार पर अमृत श्लोक हैः-

निर्मल मन जन सो मोहि पावा।

मोहि कपट छल छिद्र न भावा।

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

चला विभूतिः क्षणभगियोवनं कृपान्तदन्तान्तरवति जीवितम्।

तथाप्यवक्षा परलोकसाधने नृणामहो विस्मयकारी चेष्टितम्।

ऐशवर्य चंचल है, यौवन क्षणभंगुर है और मनुष्य का जीवन काल के दांतो के मध्य पड़ा है तो भी मनुष्य परलोक की प्राप्ति के साधन की अपेक्षा करता जाता है।अहा! मनुष्य की यह चेष्टा कैसी विस्मयकारी है?

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

दुराराध्यः स्वामी तुरगचलचित्ताः क्षितिभुजो वयं तु स्यूलेच्छा महति च पदे बध्दमनसः।

जरा देहं मृत्युर्हरति सकलं जीवितमिदं सखे नान्यच्छे्यो जगति विदुषाऽन्यत्र तपसः।

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

तुरंग की गति के समान चंचल चित्त वाले राजाओं की आराधना कठिन है। परन्तु हमारी इच्छा की स्थूलता के कारण ऊँचे से ऊँचे पद की प्राप्ति की लालसा रही आती है।

वृध्दावस्था शरीर का और मृत्यु जीवन का हरण करती है अतः हे मित्र जगत में विवेकी पुरूष के लिये तप के अतिरिक्त कोई अन्य कल्याणकारी नहीं है।

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

यह शरीर ही मेरा नही तो फिर यह धन मेरा कैसे हो सकता है।

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

भगवान् मे ही हम वह सब पाऐगें जिसकी हमे जरूरत है।

(कृष्णजी गायों के साथ बंसुरी बजाते हुए फोटो के साथ लिखा हुआ है।)

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

अपनी भूलों को पहचानने से बडा साहस कोई नहीं है।

(कृष्णजी गायों के साथ बंसुरी बजाते हुए फोटो के साथ लिखा हुआ है।)

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

इसके बाद तिबारा आता हैः- इस तिबारे के सामने ऊपर टीन शेड़ लगा है और यह छः उमरावों के साथ बनाया गया है। इस तिबारे में पूर्व व पश्चिम में एक-एक कमरा बना है। इस तीबारे में चार गोदरेज की अलमारियां है इन अलमारियों पर गेट लगे है। यह अलमारियां तिबारे की दक्षिण दीवार में बनी हुई है। इन अलमारियों का उपयोग यहां रूकने वाले भक्तों के पूजा /स्वयं के सामान रखने के काम में ली जाती है। हर अलमारी के बीच में श्री हनुमान जी, श्रीगणेशजी ,शिवजी की सुदंर पेन्टींग वाली तस्वीरे लगी है। यह तिबारा भक्तों द्वारा पूजा के काम में लिया जाता है। इस तीर्थ स्थली को पूर्णतः आध्यातमिक बनाने के लिए लोगों लोगो का सार्वजनिक नोट लगा कर हिदायते व सहयोग के लिए लिखा गया है आश्रम में ट्रांजिस्टर बजाना मना है। सहयोग से नोट को देखने के बाद जब हम सफर पूर्व दिशा में जारी रखते है तो हमें वहीं महात्भ्य का अहसास होता है अमृत श्लोको को पढते हुएः-

सभी अच्छे काम मिल जुल कर धीरज के साथ किये गये प्रयास से होता है।

(कृष्णजी गायों के साथ बंसुरी बजाते हुए फोटो के साथ लिखा हुआ है।)

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

हमें हमेशा पूरी तरह ऐकान्तिक रूप से भगवान् के सेवक होना चाहिये।

(श्रीकृष्ण राधा की फोटो है)

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

इसके बाद तिबारे के ऊपर जाने की 18 सीढीयां है तथा पांचवां द्वार आता है। पांचवे द्वार से पूर्व दिशा में चलते हुए दक्षिण दीवार पर अमृत श्लोक का सिलसिला जारी रहता हैः-

उपकार करके भूलो, ईष्वर है। अपमान को भूलो, मरना है।

(श्रीगणेशजी की फोटो के साथ लिखा हुआ है।)

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

अपुज्या यत्रपुज्यन्ते, पुज्यानाम च अतिकर्मः।

तंत्र त्रीवणी भविष्यन्ती, दुभिंष,मरण ,भयं।

(शिव पार्वती की फोटो के साथ लिखा हुआ है।)

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

कबीरा क्षुधा है कुकरी करत भजन में भंग।

या को टुकड़ा डाल कर भजन करो निक्षंक।

(श्रीगणेशजी की फोटो के साथ लिखा हुआ है।)

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

यथा सम्भव कम बोलो,

काम जितना अधिक कर सकते हो करो।

(कृष्णजी गायों के साथ बंसुरी बजाते हुए फोटो है।)

(कृष्णजी गायों के साथ बंसुरी बजाते हुए फोटो के साथ लिखा हुआ है।)

इसके बाद बालकुटिर (बुर्ज) है। यह बुर्ज दक्षिण -पूर्व के कोने बनी हुई में है। इस बुर्ज के ऊपर जाने के लिए 18 सीढीयां है तथा पूर्व दीवार पर अमृत श्लोक :-

जिस लक्ष्य को, जिस मार्ग को तू चुनता है वही तेरी नियति है।

(शिव की फोटो के साथ लिखा हुआ था।)

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

सच्ची भावना से किया गया काम ध्यान बनता है।

(शिव की फोटो के साथ लिखा हुआ था।)

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

इसके बाद एक कमरा बना हुआ है। कमरे का गेट है।

सह ज सह ज होयेगा , जो कुछ रचिया राम।

काहे को कल्प मरे , दुखी होत बैकाम ।

 

(श्रीगणेशजी की फोटो के साथ लिखा हुआ है।)

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

कबीरा सब निर्धना, धनवन्ता नही कोय।

धनवन्ता वह जानिये , जाकि राम नाम धन होय।

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

(कृष्णजी गायों के साथ बंसुरी बजाते हुए फोटो के साथ लिखा हुआ है।)

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

इसके पश्चात काले संगमरमर का बेसन है इसमें तीन नल लगे हुए है। इसका पानी हाथों की शुध्दि व पीने के काम में लिया जाता है।

भोजन कुरू दुबुध्द ! मारीर दया कुरू।

परान्न दुर्लभ लोके शरीराणी पुनं पुनं।।

।।जय श्री झाड़खण्डनाथ।।

इसके बाद एक कमरा बना हुआ है और कमरे का गेट है। इसके बाद श्रीझाडखण्डनाथ तीर्थ स्थली यानि पंचनाथों में एक नाथ झाड़खण्डनाथ का आंतरिक मुख्य प्रवेश  द्वार आ जाता है और हमारा दीवारों के साथ चारों दिशाओं में पहरी के रूप में पहरी रूप में स्थापित चारों बुर्जो का सफर पूरा होता है। अब हमारी यात्र के (दूसरे चरण) अहम सफर श्रीझाडखण्डनाथ तीर्थ स्थली से जुडे़ स्मर्णीय पहलूओं  व आंतरिक भाग में विचरण करके पंचनाथों में एक नाथ श्रीझाड़खण्डनाथ स्वयंभू शिव ज्योर्तिलिंग के दर्शनों का आंनद उठाते है।